KanoonSamvad.com | रांची
झारखंड में सूचना का अधिकार (RTI) कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने राज्य सूचना आयोग से मांग की है कि जो जन सूचना पदाधिकारी (PIO) RTI Act, 2005 के तहत निर्धारित 30 दिनों की समय-सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराते, उनके विरुद्ध RTI Act की धारा 20 के तहत दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। यह मांग एक पत्र के माध्यम से राज्य सूचना आयोग के समक्ष रखी गई है। (यह जानकारी उपयोगकर्ता द्वारा साझा किए गए समाचार पर आधारित है।)
क्या है पूरा मामला?

समाचार के अनुसार, विजय शंकर नायक ने राज्य सूचना आयोग को लिखे पत्र में कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कानून है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के कई विभागों, निगमों, बोर्डों और स्थानीय निकायों में—
- समय पर सूचना नहीं दी जाती,
- कई मामलों में अधूरी सूचना दी जाती है,
- या बिना वैधानिक कारण के आवेदन अस्वीकार कर दिए जाते हैं।
इसके कारण नागरिकों को प्रथम अपील और बाद में राज्य सूचना आयोग तक जाना पड़ता है, जिससे आयोग पर मामलों का बोझ लगातार बढ़ता है।
क्या है धारा 20 का प्रावधान?
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 20 के अनुसार, यदि कोई जन सूचना पदाधिकारी—
- बिना उचित कारण सूचना देने में देरी करता है,
- गलत, अपूर्ण या भ्रामक सूचना देता है,
- या जानबूझकर सूचना देने से इनकार करता है,
तो सूचना आयोग उस पर प्रति दिन ₹250 के हिसाब से अधिकतम ₹25,000 तक का आर्थिक दंड लगा सकता है। आयोग आवश्यक होने पर विभागीय कार्रवाई की भी संस्तुति कर सकता है।
कांग्रेस नेता की प्रमुख मांगें
समाचार के अनुसार विजय शंकर नायक ने सुझाव दिया कि—
- सभी विभागों के PIO एवं प्रथम अपीलीय अधिकारियों की नियमित समीक्षा बैठक बुलाई जाए।
- प्रत्येक RTI आवेदन का 30 दिनों के भीतर अनिवार्य निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
- जो अधिकारी कानून का उल्लंघन करें, उनके विरुद्ध धारा 20 के तहत कार्रवाई की जाए।
- विभागों में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
RTI कानून क्यों है महत्वपूर्ण?
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 नागरिकों को सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का कानूनी अधिकार देता है।
इस कानून के माध्यम से नागरिक—
- सरकारी रिकॉर्ड की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं,
- सरकारी निर्णयों पर जवाबदेही तय कर सकते हैं,
- और प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत बना सकते हैं।
झारखंड राज्य सूचना आयोग भी RTI अपीलों और शिकायतों के निस्तारण के लिए कार्य करता है।
कानूनी दृष्टिकोण
यदि किसी RTI आवेदन का निर्धारित समय में निस्तारण नहीं किया जाता, तो संबंधित आवेदक—
- प्रथम अपील,
- द्वितीय अपील,
- अथवा शिकायत
का वैधानिक अधिकार रखता है। दंड लगाया जाए या नहीं, इसका निर्णय प्रत्येक मामले के तथ्यों और RTI Act की धारा 20 के प्रावधानों के अनुसार संबंधित सूचना आयोग करता है।
Discussion Question
क्या आपके अनुसार 30 दिनों के भीतर सूचना न देने वाले जन सूचना अधिकारियों पर RTI Act की धारा 20 के तहत दंडात्मक कार्रवाई अनिवार्य रूप से होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें।
