ऊर्जा विभाग के PIO पर ₹25,000 का जुर्माना और मुआवजा और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति! RTI में लापरवाही पर कड़ा एक्शन — 11 जून 2026 का आदेश

उत्तर प्रदेश सूचना आयोग द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मनमानी और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ शिकंजा कसना जारी है। राज्य सूचना आयोग की ओर से ऊर्जा विभाग (पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड) से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण अर्थदंड और मुआवजा वसूली पत्र सामने आया है, जो यह साबित करता है कि समयावधि में सही जानकारी न देना अधिकारियों को कितना भारी पड़ सकता है।

प्रमुख मामले का विवरण (Case Overview):

  • पत्रांक संख्या: 202606S11PN00001 / रा.सू.आ. / रजिस्ट्रार / शा.अनु.-अर्थदण्ड वसूली / 2026 (डी-1)
  • दिनांक: 11/06/2026
  • अपील संख्या: S11/A/0826/2024
  • आवेदक: श्री लाल मणि कश्यप (ग्राम सादुल्लापुर, पोस्ट वेदपुरा, जिला गौतमबुद्धनगर – 201301)
  • बनाम: ऊर्जा विभाग (Energy Department / पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड)
  • दोषी अधिकारी (PIO): श्री राहुल शर्मा / श्री संजीव कुमार वैश्य (अधीक्षण अभियन्ता / मुख्य अभियन्ता कार्यालय, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लि0, गौतमबुद्धनगर – 201301)
  • मामले के मुख्य बिंदु:
    • माननीय राज्य सूचना आयुक्त (श्री वीरेंद्र प्रताप सिंह, सुनवाई कक्ष संख्या S-11) द्वारा पारित आदेश (दिनांक 30-12-2025 / आदेश संदर्भ 11 जून 2026) के अनुपालन में, लोक सूचना अधिकारी के विरुद्ध धारा 20(1) के तहत ₹25,000/- (पच्चीस हजार रुपये) का अर्थदंड अधिरोपित किया गया है तथा धारा 19(8) के तहत मुआवजे का प्रावधान किया गया है।
    • रजिस्ट्रार, उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार प्रमुख सचिव (ऊर्जा), उत्तर प्रदेश शासन को यह निर्देशित किया गया है कि उक्त अर्थदंड की धनराशि दोषी PIO के वेतन से काटकर निर्धारित लेखा शीर्ष में जमा कराई जाए तथा 3 माह के भीतर अनुपालन आख्या (वेतन पर्ची के प्रमाण सहित) आयोग को प्रेषित की जाए।
appeal number s11 a 0826 2024

उपलब्ध आदेश के अनुसार, इस मामले में धारा 20(1) के तहत ₹25,000 का अर्थदंड तथा धारा 20(2) के तहत विभागीय (Disciplinary) कार्रवाई की संस्तुति भी की गई है।

यह आदेश बताता है कि RTI कानून केवल सूचना प्राप्त करने का अधिकार नहीं देता, बल्कि उचित मामलों में जवाबदेही भी सुनिश्चित करता है।

इससे क्या सीख मिलती है?

यह आदेश एक बार फिर इस बात की पुष्टि करता है कि RTI अधिनियम आम नागरिकों के हाथों में एक बहुत बड़ा और प्रभावी कानूनी हथियार है। यदि लोक प्राधिकारी समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराते हैं, तो आयोग कानून के तहत उनके वेतन से सीधे जुर्माने की वसूली सुनिश्चित करता है।

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