RTI Success Story: अधूरी सूचना पर CIC का हस्तक्षेप, विभाग को Promotion Policy उपलब्ध कराने का निर्देश

मामला संक्षेप में

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत एक आवेदक ने एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) से पदोन्नति (Promotion) से संबंधित जानकारी मांगी। आवेदन में यह जानना चाहा गया था कि गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे कर्मचारी को पदोन्नति प्रदान किए जाने की स्थिति में लागू नीति, विभागीय प्रक्रिया तथा संबंधित अभिलेख क्या थे।

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लोक सूचना अधिकारी (CPIO) द्वारा आंशिक उत्तर प्रदान किया गया, जबकि कुछ सूचनाओं को गोपनीय बताते हुए उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे असंतुष्ट होकर आवेदक ने प्रथम अपील तथा बाद में केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) में द्वितीय अपील दायर की।

सुनवाई के दौरान

सुनवाई के दौरान विभाग ने आयोग को बताया कि संबंधित मामले में उपलब्ध तथ्यात्मक जानकारी पहले ही प्रदान की जा चुकी है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ अभिलेख तीसरे पक्ष (Third Party) से संबंधित हैं तथा उन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

हालांकि आयोग के समक्ष यह भी सामने आया कि पदोन्नति नीति (Promotion Policy) तथा वर्तमान में प्रभावी संबंधित परिपत्र (Circulars) उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

आयोग का निर्णय

केंद्रीय सूचना आयोग ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद निम्न महत्वपूर्ण निष्कर्ष दिए—

  • तीसरे पक्ष से संबंधित व्यक्तिगत सेवा अभिलेख एवं फाइल टिप्पणियां (File Notings) सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(j) के अंतर्गत संरक्षित हैं।
  • विभाग द्वारा कुछ बिंदुओं पर दिया गया उत्तर पर्याप्त नहीं था।
  • विभाग को निर्देश दिया गया कि वह आवेदक को पदोन्नति नीति (Promotion Policy) तथा उससे संबंधित प्रभावी परिपत्रों (Circulars) की प्रतियां उपलब्ध कराए।
  • विभाग को संशोधित उत्तर (Revised Reply) निर्धारित अवधि के भीतर उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया।
order 11 jun 2026
Source: Order of the Central Information Commission dated 11.06.2026. Relevant extract reproduced for educational and informational purposes.

आवेदक को मिली राहत

यद्यपि आयोग ने तीसरे पक्ष की व्यक्तिगत फाइल टिप्पणियां उपलब्ध कराने का निर्देश नहीं दिया, फिर भी आवेदक को महत्वपूर्ण राहत प्राप्त हुई क्योंकि आयोग ने विभाग को—

✔ संशोधित उत्तर देने का निर्देश दिया।

✔ पदोन्नति नीति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

✔ संबंधित प्रभावी परिपत्रों की प्रतियां उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

इस निर्णय से क्या सीख मिलती है?

यह मामला दर्शाता है कि यदि किसी विभाग द्वारा अधूरी, अस्पष्ट या अपूर्ण सूचना दी जाती है, तो नागरिक केंद्रीय सूचना आयोग तक जाकर प्रभावी राहत प्राप्त कर सकते हैं।

साथ ही यह निर्णय यह भी स्पष्ट करता है कि—

  • सार्वजनिक नीतियां (Policies) और प्रशासनिक परिपत्र (Circulars) सामान्यतः प्रकटीकरण योग्य होते हैं।
  • जबकि किसी कर्मचारी के व्यक्तिगत सेवा अभिलेख, फाइल टिप्पणियां एवं निजी जानकारी धारा 8(1)(j) के अंतर्गत संरक्षित हो सकती हैं।

निष्कर्ष

सूचना का अधिकार केवल सूचना प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने का एक प्रभावी संवैधानिक उपकरण है। इस मामले में आयोग के हस्तक्षेप से आवेदक को अतिरिक्त एवं अधिक स्पष्ट सूचना प्राप्त करने का अधिकार सुनिश्चित हुआ।

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