क्या था मामला?
अपीलकर्ता Gitesh Kumar ने अपने विरुद्ध वर्ष 2019 में शुरू हुई विभागीय जांच (Departmental Inquiry), जो 18.05.2022 को समाप्त हो चुकी थी, से संबंधित अभिलेख RTI के माध्यम से मांगे।
उन्होंने मांगी थी—
- कथित गवाह का नाम एवं पहचान
- गवाह के बयान की प्रमाणित प्रति
- मृत्यु प्रमाणपत्र (यदि गवाह को मृत बताया गया)
- Inquiry File Notings
- Withdrawal Letter
- संबंधित पत्राचार
- जांच किस आधार पर जारी रखी गई, उससे जुड़े रिकॉर्ड
CPIO ने क्या कहा?
CPIO ने सूचना देने से इनकार करते हुए कहा—
- Section 8(1)(h) के तहत सूचना देने से जांच प्रभावित होगी।
- कुछ प्रश्न स्पष्ट नहीं हैं।
- “क्यों” और “किस आधार पर” जैसे प्रश्न Section 2(f) के अंतर्गत सूचना नहीं हैं क्योंकि वे स्पष्टीकरण (Explanation) मांगते हैं।
FAA ने भी यही निर्णय बरकरार रखा और कुछ सूचनाओं पर Section 8(1)(g) (सूचना स्रोत एवं सुरक्षा) का भी हवाला दिया।

CIC में अपीलकर्ता ने क्या कहा?
अपीलकर्ता ने आयोग के समक्ष कहा—
✅ विभागीय जांच 2022 में समाप्त हो चुकी है।
✅ अब Section 8(1)(h) का सहारा लेकर उसके अपने केस के दस्तावेज़ रोकना उचित नहीं है।
✅ जिन व्यक्तियों के नाम छिपाए जा रहे हैं, वे पहले से सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं।
आयोग का महत्वपूर्ण निर्णय
आयोग ने CPIO का उत्तर अंतिम रूप से स्वीकार नहीं किया।
बल्कि निर्देश दिया कि—
✅ CPIO पूरे RTI आवेदन पर पुनः विचार (Revisit) करेगा।
✅ प्रत्येक बिंदु पर संशोधित (Revised) उत्तर देगा।
✅ 15 दिनों के भीतर Speed Post एवं Email से उत्तर भेजेगा।
✅ उसके बाद 7 दिनों के भीतर आयोग को Compliance Report भेजेगा।
✅ यदि सूचना किसी अन्य शाखा के पास है तो CPIO स्वयं मंगवाकर उपलब्ध कराए।
✅ यदि रिकॉर्ड का कुछ भाग अपवाद (Exempted) है तो पूरे दस्तावेज़ को रोकने के बजाय RTI Act की Section 10 के अनुसार केवल गोपनीय भाग हटाकर (Redaction) शेष सूचना उपलब्ध कराई जाए।
इस आदेश से क्या महत्वपूर्ण सिद्धांत स्थापित होता है?
यह आदेश स्पष्ट करता है कि—
✔ केवल Section 8(1)(g) या 8(1)(h) लिख देना पर्याप्त नहीं है।
✔ CPIO को प्रत्येक सूचना पर अलग-अलग विचार करना होगा।
✔ यदि पूरा रिकॉर्ड देने में बाधा है, तो केवल गोपनीय अंश हटाकर शेष रिकॉर्ड देना होगा।
✔ यदि सूचना किसी अन्य शाखा के पास है, तो CPIO का दायित्व है कि वह उसे प्राप्त कर आवेदक को उपलब्ध कराए।
✔ विभागीय जांच समाप्त होने के बाद भी सूचना रोकने का दावा स्वतः स्वीकार नहीं किया जाएगा; CPIO को उचित कारणों सहित पुनः परीक्षण करना होगा।
KanoonSamvad.com विश्लेषण
यह आदेश RTI आवेदकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्रीय सूचना आयोग ने स्पष्ट किया कि CPIO केवल अपवाद धाराओं का सामान्य उल्लेख करके सूचना देने से इनकार नहीं कर सकता। जहां सूचना उपलब्ध कराई जा सकती है, वहां उसे उपलब्ध कराया जाए और केवल वास्तव में गोपनीय अंशों को Section 10 के अनुसार हटाया जाए।
विशेष रूप से विभागीय जांच, अनुशासनात्मक कार्यवाही तथा सेवा संबंधी मामलों में यह आदेश पारदर्शिता और “Maximum Disclosure, Minimum Denial” के सिद्धांत को मजबूत करता है।
📌 निर्णय:
Gitesh Kumar v. CPIO, ESIC, Kolkata
Second Appeal No. CIC/ESICO/A/2025/652054
निर्णय दिनांक: 09.09.2026
सूचना आयुक्त: Ashutosh Chaturvedi
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