RTI आवेदन चार विभागों में घूमता रहा, फिर भी नहीं मिली पूरी जानकारी; CIC ने विधि मंत्रालय को जारी किया नोटिस

नई दिल्ली | कानून संवाद डेस्क

सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम का उद्देश्य सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, लेकिन हाल ही में सामने आए एक मामले ने सरकारी विभागों के बीच समन्वय की गंभीर कमी को उजागर कर दिया है। एक RTI आवेदन को विभिन्न विभागों के बीच लगातार स्थानांतरित किया जाता रहा, फिर भी आवेदक को पूर्ण और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने विधि एवं न्याय मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

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क्या है पूरा मामला?

आवेदक ने एक महत्वपूर्ण विषय से संबंधित सूचना मांगी थी। सूचना उपलब्ध कराने के बजाय संबंधित अधिकारियों ने आवेदन को एक विभाग से दूसरे विभाग भेजना शुरू कर दिया। RTI आवेदन चार अलग-अलग विभागों के बीच घूमता रहा, लेकिन अंततः भी आवेदक को मांगी गई सूचना का समुचित उत्तर नहीं मिला। आयोग ने पाया कि विभागों द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया RTI अधिनियम की भावना के अनुरूप नहीं थी और इससे नागरिक के सूचना प्राप्त करने के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

CIC की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा कि यदि किसी सार्वजनिक प्राधिकरण के पास सूचना उपलब्ध नहीं है, तो केवल आवेदन को आगे बढ़ा देना पर्याप्त नहीं है। संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है कि वे समन्वय स्थापित कर नागरिक को यथासंभव पूर्ण सूचना उपलब्ध कराएं। आयोग ने यह भी संकेत दिया कि विभागीय उदासीनता और जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति RTI व्यवस्था को कमजोर करती है।

विधि मंत्रालय को नोटिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए CIC ने विधि एवं न्याय मंत्रालय को नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि सूचना उपलब्ध कराने में देरी और अपूर्ण उत्तर के लिए कौन जिम्मेदार है तथा भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

RTI कानून क्या कहता है?

RTI अधिनियम, 2005 के तहत यदि मांगी गई सूचना किसी अन्य सार्वजनिक प्राधिकरण के पास उपलब्ध है तो आवेदन को उचित प्राधिकरण को स्थानांतरित किया जा सकता है। लेकिन केवल आवेदन को इधर-उधर भेज देना और अंततः सूचना उपलब्ध न कराना कानून की मंशा के विपरीत माना जाता है। केंद्रीय सूचना आयोग पूर्व में भी स्पष्ट कर चुका है कि विभागीय भ्रम या समन्वय की कमी का खामियाजा नागरिक को नहीं भुगतना चाहिए।

कानून संवाद की टिप्पणी

यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि सूचना के अधिकार को प्रभावी बनाने के लिए केवल कानून होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकारी विभागों के बीच जवाबदेही और समन्वय भी आवश्यक है। यदि RTI आवेदन विभिन्न कार्यालयों में घूमते रहें और नागरिक को सूचना न मिले, तो पारदर्शिता का मूल उद्देश्य ही प्रभावित होता है। CIC का यह हस्तक्षेप प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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